महिला कानूनी संरक्षण एवं सशक्तिकरण प्रकोष्ठ
महिला सुरक्षा एवं विधिक अधिकार
घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, भरण-पोषण, दहेज प्रताड़ना और आपातकालीन सुरक्षा के संबंध में भारतीय कानून द्वारा महिलाओं को दिए गए अधिकार।
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महिला पावर लाइन (WPL)
पहचान गुप्त रखकर 24 घंटे कानूनी एवं पुलिस सुरक्षा सहायता।
112
अखिल भारतीय आपातकाल
तात्कालिक पुलिस पीसीआर वैन सहायता एवं जीपीएस ट्रैकिंग।
15100
नालसा निःशुल्क विधिक सेवा
अदालती मुकदमों के लिए सरकार द्वारा मुफ्त वकील का आवंटन।
9315955255
अपना अधिकार विधिक हेल्पलाइन
अनुभवी वकीलों से सीधी व्हाट्सएप परामर्श एवं ड्राफ्टिंग सहायता।
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005
Protection of Women from Domestic Violence Act (PWDVA)- साझा घर में रहने का अधिकार: पति या ससुराल पक्ष महिला को वैवाहिक घर से बेदखल नहीं कर सकता।
- संरक्षण आदेश (Protection Order): मजिस्ट्रेट हिंसा करने वाले व्यक्ति को महिला के नजदीक जाने से रोक सकता है।
- अंतरिम भरण-पोषण: केस लंबित रहने के दौरान भी बच्चों व महिला के खर्च का भुगतान आदेश।
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम (POSH Act, 2013)
Sexual Harassment of Women at Workplace Act- आंतरिक शिकायत समिति (ICC): 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में आईसीसी का गठन अनिवार्य है।
- 90 दिनों में जांच पूर्ण: समिति को घटना की जांच 90 दिनों के भीतर पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी होती है।
- पहचान की गोपनीयता: पीड़िता या गवाहों की पहचान उजागर करना कानूनन दंडनीय अपराध है।
भरण-पोषण एवं गुजारा भत्ता (धारा 125 CrPC / BNSS)
Right to Maintenance for Wife and Children- यदि पत्नी स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो पति कानूनी रूप से प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने हेतु बाध्य है।
- नाबालिग बच्चों की पढ़ाई, दवा व लालन-पालन का संपूर्ण खर्च पिता द्वारा देय होगा।
संविधान अनुच्छेद 39A के तहत मुफ्त वकील
NALSA / DLSA Free Advocate Services- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम (धारा 12(c)) के तहत भारत में प्रत्येक महिला आय की सीमा के बिना मुफ्त सरकारी वकील पाने की हकदार है।
- कोर्ट फीस, ड्राफ्टिंग और गवाहों के खर्चे भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा वहन किए जाते हैं।